Summer Health Tips: हीटवेव में बच्चों की देखभाल कैसे करें? जानें लू और डिहाइड्रेशन से बचाव के आसान तरीके
Summer Health Tips: गर्मी के मौसम में बच्चों की सेहत का ध्यान रखना पैरेंट्स के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि उनका कोमल शरीर, कमजोर इम्यूनिटी, बढ़ते तापमान और संक्रमणों को झेलने में अक्षम होता है। इसके अलावा इस मौसम में बच्चों को पाचनतंत्र और त्वचा से संबंधित कई स्वास्थ्य समस्याएं भी होने की आशंका रहती हैं। कुछ ऐसी ही समस्याओं और उनके समाधान के बारे में, यहां बता रहे हैं।
1. नवजात शिशु की देखभाल: अगर आपके घर में एक साल से कम उम्र का कोई बच्चा है तो हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि उसके शरीर में डिहाइड्रेशन की समस्या न हो। इस उम्र में बच्चे बोलने में असर्मथ होते हैं, ऐसे में पैरेंट्स को इस बात की हमेशा निगरानी चाहिए कि कहीं शिशु के होंठ तो नहीं सूख रहे, कहीं वह बहुत सुस्त तो नहीं है, कहीं यूरिन डिस्चार्ज में रुकावट तो नहीं आ रही?
अगर बच्चे के शरीर में ऐसा कोई भी लक्ष्ण नजर आए तो यह इस बात का संकेत है कि उसके शरीर में पानी की कमी है, जो शिशु के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। गंभीर स्थिति में शिशु को बुखार और उल्टियां भी हो सकती हैं। ऐसे में बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें। ऐसी स्थिति मंं मां का दूध शिशु के लिए सबसे सुरक्षित आहार माना जाता है। ओआरएस का घोल पिलाना भी फायदेमंद साबित होता है।
2. मौसम से जुड़ी परेशानियां: आजकल अधिकतर घरों में एयरकंडीशनरया कूलर लगा होता है। ऐसे में जब बच्चे घर के ठंडे वातावरण से अचानक बाहर निकलते हैं, तो हीट के एक्सपोजर से उन्हें सर्दी-जुकाम, बुखार और सिरदर्द जैसी समस्याएं परेशान कर सकती हैं। इस मौसम में खेलकूद के दौरान बच्चों के शरीर में ज्यादा पसीना निकलता है, इससे उनके शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन हो जाता है, जिससे उन्हें चक्कर आना, बुखार, दस्त और कमजोरी जैसी समस्याएं परेशान करसकती हैं।
ऐसी कंडीशन को हीट स्ट्रोक या लू लगना कहा जाता है। इस मौसम में पसीने की वजह से बच्चे की त्वचा पर छोटे-छोटे लाल दाने निकल आते हैं, जिन्हें घमौरियां कहा जाता है। इसके अलावा देर तक पसीने वाले गीले कपड़े पहने रहने की वजह से फंगल इंफेक्शन भी हो सकता है। तेज धूप के संपर्क में आने से सनबर्न की भी समस्या हो सकती है। इससे त्वचा की रंगत काली पड़ जाती है।
3. पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याएं: इस मौसम में बच्चों को गैस्ट्रोएंटेराइटिस, लूज मोशन,वॉमिटिंग और फूडप्वॉइजनिंगजैसी समस्याएं भी परेशान कर सकती हैं। गर्मियों में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं, इसलिए खाने-पीने की चीजें जल्दी दूषित हो जाती हैं, जो बीमारी का कारण बन जाती हैं। स्कूल जाने वाले बच्चे घर से बाहर खुले में बिकने वाली चाट, पकौड़ी, कटे फल, लस्सी, जूस और शर्बत जैसी चीजें खाते-पीते हैं, जिससे उनके पेट और गले में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
टाइफाइड के मामले भी इस मौसम में ज्यादा सामने आते हैं। इस मौसम में मच्छर भी तेजी से पनपते हैं, इसलिए बच्चों को डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियां भी परेशान करती हैं। इसी मौसम में वायरल फीवर और चिकन पॉक्स की भी आशंका बढ़ जाती है। गर्मी से राहत के लिएकई बच्चे स्विमिंग पूल में जाते हैं, जिससे कई बार उनके कान में इंफेक्शन भी हो जाता है। उनकी आंखों में कंजंक्टिवाइटिस की भी समस्या हो सकती है।
कैसे करें बचाव
- -बच्चों कोलूज कॉटन और आरामदेह ड्रेस पहनाएं। बेहतर यही होगा कि स्कूल जाने वाले बच्चों को फुल स्लीव्स वाले ड्रेस पहनाएं। यह तरीका मच्छरों और टैनिंग से बचाव में मददगार होगा।
- -आजकल बच्चों के लिए अलग सनस्क्रीन आती हैं, जब बच्चे धूप में घर से बाहर जाएं तो उनके शरीर के खुले हिस्से पर सनस्क्रीन लगाना न भूलें।
- -स्ट्रीट फूड से बीमारियों और संक्रमण का सबसे अधिक खतरा होता है, इसलिए बच्चों पर इस बात की पूरी निगरानी रखें कि वे बाहर खुले में बिकने वाली चीजें न खाएं।
- -घर पर रोजाना ताजा भोजन बनाकर उन्हें खिलाएं। फ्रिज में रखी बासी और ठंडी चीजें सेहत के लिए नुकसानदेह होती हैं।
- -दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक तेज धूप होती है। इस दौरान बच्चों को खेलने के लिए घर से बाहर न भेजें। जब बच्चे को घर से बाहर निकलना हो उससे आधे घंटे पहले कमरे का एसी ऑफ कर दें।
- -बच्चे जब भी घर से बाहर जाएं, उनके साथ पानी की बॉटल जरूर दें।
- -अगर आप बच्चे को स्विमिंग के लिए भेजती हैं, तो पूल के सफाई व्यवस्था की जांच अवश्य करें।
- -बच्चों को ज्यादा पानी पीने के लिए प्रेरित करें। उनकी डाइट में ताजा मौसमी फलों, छाछ, लस्सी और जूस जैसे तरल पदार्थों की मात्रा बढ़ाएं लेकिन बाजार में बिकने वाले डिब्बाबंद जूस न दें। यह सेहत के लिए बहुत नुकसानदेह होता।
सीएम डॉ. मोहन यादव का 25 मई को धार दौरा, भोजशाला में करेंगे दर्शन-पूजन, जल संरक्षण का देंगे संदेश, शहरभर में तैयारियां तेज
धार नगरी इन दिनों एक विशेष उत्साह और उत्सुकता के रंग में रंगी हुई है, जहाँ हर गली, हर चौराहे पर एक महत्वपूर्ण आगमन की प्रतीक्षा की जा रही है। शहर की फिजाओं में एक अलग ही ऊर्जा घुल गई है, जनमानस में एक विशेष उमंग का संचार हो रहा है, क्योंकि 25 मई को प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं इस ऐतिहासिक भूमि पर कदम रखने वाले हैं। उनका यह दौरा केवल एक राजकीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि धार के धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य में एक नई इबारत लिखने को तैयार है, जिसकी आहटें अभी से सुनाई देने लगी हैं।
प्रस्तावित कार्यक्रम की रूपरेखा को देखा जाए तो मुख्यमंत्री का यह आगमन कई मायनों में अहमियत रखता है। सबसे पहले, वे धार के हृदय में स्थित उस ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल, भोजशाला, पहुँचकर दर्शन-पूजन करेंगे। भोजशाला, जहाँ सदियों से ज्ञान और आस्था का संगम होता रहा है, अपने पत्थरों में अनेकों कहानियाँ समेटे हुए है। हाल ही में आए न्यायालयीन निर्णय के बाद इसकी अहमियत और बढ़ गई है। मुख्यमंत्री का यहाँ पहुंचना केवल एक सामान्य धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक गहरी आस्था और सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक है। वे वहाँ पहुंचकर न केवल श्रद्धा सुमन अर्पित करेंगे, बल्कि उस भूमि की आत्मा से जुड़ने का प्रयास करेंगे, जो अपने भीतर अनेकों ऐतिहासिक साक्ष्य परत दर परत समेटे हुए है। यह क्षण धार के सांस्कृतिक गौरव को एक नई पहचान देगा।
मुख्यमंत्री देवीजी मुंज सागर तालाब पर करेंगे श्रमदान
यह दौरा केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि एक व्यापक सामाजिक संदेश भी लिए हुए है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देवीजी मुंज सागर तालाब पर श्रमदान करेंगे। यह श्रमदान केवल प्रतीकात्मक नहीं होगा, बल्कि जल संरक्षण के प्रति उनकी और सरकार की प्रतिबद्धता का प्रत्यक्ष प्रमाण होगा। मुंज सागर तालाब, जो धार के प्राचीन और ऐतिहासिक जल स्रोतों में से एक है, वहाँ मुख्यमंत्री का स्वयं श्रमदान करना, आमजन को इस पुनीत कार्य से जुड़ने के लिए प्रेरित करेगा। यह एक सशक्त संदेश देगा कि प्रकृति का संरक्षण और जल स्रोतों का संवर्धन आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है, जिसके लिए हर नागरिक को आगे आना होगा। यह पहल पर्यावरणीय चेतना को जगाने और उसे जन आंदोलन का रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
मुख्यमंत्री मोतीबाग चौक पर जनसभा को करेंगे संबोधित
इसके उपरांत, जनता से सीधा संवाद स्थापित करने के लिए मुख्यमंत्री मोतीबाग चौक पर एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। यह मंच राजनीतिक संवाद का केंद्र बनेगा, जहाँ वे राज्य की प्रगति, जनकल्याणकारी योजनाओं और भविष्य की रूपरेखा पर प्रकाश डालेंगे। यह अवसर होगा जब हजारों की संख्या में लोग अपने मुख्यमंत्री को सुनने और उनसे सीधा जुड़ने के लिए उमड़ेंगे। उनकी बातों में राज्य के विकास का रोडमैप और धार के लिए विशेष योजनाएं भी सामने आ सकती हैं, जो इस क्षेत्र के भविष्य को नई दिशा देंगी। यह जनसभा केवल भाषणों का मंच नहीं, बल्कि जनता और सरकार के बीच एक सेतु का काम करेगी, जहाँ जन अपेक्षाएं और सरकारी संकल्प एक साथ गूँजेंगे।
मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर तैयारियों तेज
इन महत्वपूर्ण आयोजनों को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए प्रशासन और भाजपा संगठन, दोनों ही पूरी मुस्तैदी से जुटे हुए हैं। धार कलेक्टर राजीव रंजन मीना स्वयं तैयारियों का लगातार जायजा ले रहे हैं, ताकि हर व्यवस्था त्रुटिहीन हो और किसी भी प्रकार की चूक की कोई गुंजाइश न रहे। भाजपा संगठन भी अपने कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर शहर के हर कोने को सजाने और स्वागत की तैयारियों को अंतिम रूप देने में लगा है। मोतीबाग चौक पर सभा स्थल को भव्यता प्रदान की जा रही है, जहाँ एक विशाल और आकर्षक मंच आकार ले रहा है, जिसके चारों ओर पंडाल लगाए जा रहे हैं ताकि उपस्थित जनसमूह को धूप या वर्षा से बचाया जा सके। दर्शकों की सुविधा के लिए पार्किंग की समुचित व्यवस्था की जा रही है, ताकि किसी को भी असुविधा का सामना न करना पड़े और आवागमन सुचारु बना रहे। पेयजल की उपलब्धता और सुरक्षा व्यवस्थाओं को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके। हर छोटी से छोटी बात पर बारीकी से ध्यान दिया जा रहा है, ठीक वैसे ही जैसे किसी प्राचीन कलाकृति की बारीकियों पर नजर डाली जाती है, ताकि मुख्यमंत्री का यह दौरा एक यादगार और सफल आयोजन बन सके।
इस दौरे को केवल एक सामान्य राजकीय कार्यक्रम के तौर पर नहीं देखा जा रहा है, बल्कि इसके पीछे कई परतें हैं। विशेषकर, हाल ही में भोजशाला से जुड़े न्यायालयीन निर्णय के बाद, मुख्यमंत्री का यह आगमन धार्मिक और राजनीतिक, दोनों ही दृष्टियों से अत्यधिक महत्व रखता है। यह निर्णय धार के इतिहास और वर्तमान, दोनों को प्रभावित करने वाला रहा है, और ऐसे समय में मुख्यमंत्री का भोजशाला पहुंचना एक गहरा संदेश देता है। यह दौरा न केवल आस्थावानों के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण होगा, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी इसकी गूँज सुनाई देगी। यह दर्शाता है कि सरकार धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति कितनी गंभीर है, और साथ ही जनता के बीच अपनी नीतियों और विचारधारा को प्रभावी ढंग से पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण मंच भी है। इस दौरे के माध्यम से मुख्यमंत्री न केवल धार की जनता से सीधा संवाद करेंगे, बल्कि एक व्यापक संदेश भी देंगे जो राज्य के सामाजिक और राजनीतिक ताने-बाने पर अपनी छाप छोड़ेगा और आने वाले समय में इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
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