भारत के सबसे तेज धावक बने गुरिंदरवीर सिंह: 100 मीटर दौड़ 10.09 सेकंड में पूरी की, उसेन बोल्ट हैं प्रेरणा
रांची में आयोजित फेडरेशन कप में पंजाब के धावक गुरिंदरवीर सिंह ने इतिहास रच दिया है। उन्होंने 100 मीटर दौड़ मात्र 10.09 सेकंड में पूरी कर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। वे अब भारत के सबसे तेज धावक बन गए हैं। विश्व के सबसे तेज धावक उसेन बोल्ट का वर्ल्ड रिकॉर्ड 9.58 सेकंड का है। उसैन बोल्ट गुरिंदरवीर सिंह की प्रेरणा हैं।
शानदार प्रदर्शन के बाद गुरिंदरवीर सिंह ने कहा, "लोग पहले सोचते थे कि भारतीयों के जीन्स कमजोर होते हैं, कि भारतीय 100 मीटर की दौड़ नहीं लगा सकते और स्प्रिंटिंग में कोई भविष्य नहीं है। मैं बस सबको गलत साबित करना चाहता हूं। भारतीयों के जीन्स बहुत मजबूत हैं और यह तो बस शुरुआत है।"
बीमारी के कारण खराब हुआ था प्रदर्शन
कभी पेट की गंभीर बीमारी और लगातार गिरते प्रदर्शन से जूझ रहे गुरिंदरवीर ने संघर्ष, मेहनत और वापसी की ऐसी कहानी लिखी, जिसने पूरे देश को प्रेरित कर दिया। उसैन बोल्ट से प्रेरित होकर ट्रैक पर उतरने वाले इस एथलीट ने अब भारतीय एथलेटिक्स में नया अध्याय जोड़ दिया है।
कॉमनवेल्थ गेम में जगह पक्की
जानकारी के अनुसार, 29 वें नेशनल सीनियर फेडरेशन कप में धावक गुरिंदरवीर सिंह ने 100 मीटर दौड़ मात्र 10.09 सेकंड में पूरी की। उन्हें स्वर्ण पदक मिला। राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने के साथ ही उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) में अपनी जगह भी पक्की कर ली है। खेल विशेषज्ञों के मुताबिक यह प्रदर्शन भारत की स्प्रिंटिंग क्षमता में बड़े बदलाव का संकेत है, जो आने वाले एशियन, कॉमनवेल्थ और ओलंपिक स्तर पर मजबूत चुनौती पेश कर सकता है।
आसान नहीं थी राह
गुरिंदरवीर सिंह का सफर चुनौतियों से भरा रहा है। कुछ समय पहले उन्हें पेट में अल्सर की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ा था। इस समस्या के कारण वह कुछ भी खा-पी नहीं पा रहे थे और उनका वजन काफी कम हो गया था। इसके चलते उनके दौड़ने के समय (टाइमिंग) में भी काफी गिरावट आ गई थी।
साल 2022 में गुरिंदरवीर के का सबसे अच्छा रिकॉर्ड गिरकर 10.93s पर आ गया था। 2023 में वापसी के बाद, उन्होंने साल का अपना सबसे तेज समय 10.50s निकाला। लेकिन बीते साल ही उन्होंने 10.33s के समय के साथ फेडरेशन कप में गोल्ड मेडल जीता।
हालांकि, दौड़ के दौरान +2.5 m/s की तेज हवा के कारण उस प्रदर्शन को नियमों के अनुसार अमान्य घोषित कर दिया गया था। जून 2024 में नेशनल इंटर-स्टेट चैंपियनशिप में उन्होंने 10.32s का समय निकालकर अमलान और अनिमेष कुजूर को पछाड़ते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया था।
Summer Health Tips: हीटवेव में बच्चों की देखभाल कैसे करें? जानें लू और डिहाइड्रेशन से बचाव के आसान तरीके
Summer Health Tips: गर्मी के मौसम में बच्चों की सेहत का ध्यान रखना पैरेंट्स के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि उनका कोमल शरीर, कमजोर इम्यूनिटी, बढ़ते तापमान और संक्रमणों को झेलने में अक्षम होता है। इसके अलावा इस मौसम में बच्चों को पाचनतंत्र और त्वचा से संबंधित कई स्वास्थ्य समस्याएं भी होने की आशंका रहती हैं। कुछ ऐसी ही समस्याओं और उनके समाधान के बारे में, यहां बता रहे हैं।
1. नवजात शिशु की देखभाल: अगर आपके घर में एक साल से कम उम्र का कोई बच्चा है तो हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि उसके शरीर में डिहाइड्रेशन की समस्या न हो। इस उम्र में बच्चे बोलने में असर्मथ होते हैं, ऐसे में पैरेंट्स को इस बात की हमेशा निगरानी चाहिए कि कहीं शिशु के होंठ तो नहीं सूख रहे, कहीं वह बहुत सुस्त तो नहीं है, कहीं यूरिन डिस्चार्ज में रुकावट तो नहीं आ रही?
अगर बच्चे के शरीर में ऐसा कोई भी लक्ष्ण नजर आए तो यह इस बात का संकेत है कि उसके शरीर में पानी की कमी है, जो शिशु के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। गंभीर स्थिति में शिशु को बुखार और उल्टियां भी हो सकती हैं। ऐसे में बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें। ऐसी स्थिति मंं मां का दूध शिशु के लिए सबसे सुरक्षित आहार माना जाता है। ओआरएस का घोल पिलाना भी फायदेमंद साबित होता है।
2. मौसम से जुड़ी परेशानियां: आजकल अधिकतर घरों में एयरकंडीशनरया कूलर लगा होता है। ऐसे में जब बच्चे घर के ठंडे वातावरण से अचानक बाहर निकलते हैं, तो हीट के एक्सपोजर से उन्हें सर्दी-जुकाम, बुखार और सिरदर्द जैसी समस्याएं परेशान कर सकती हैं। इस मौसम में खेलकूद के दौरान बच्चों के शरीर में ज्यादा पसीना निकलता है, इससे उनके शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन हो जाता है, जिससे उन्हें चक्कर आना, बुखार, दस्त और कमजोरी जैसी समस्याएं परेशान करसकती हैं।
ऐसी कंडीशन को हीट स्ट्रोक या लू लगना कहा जाता है। इस मौसम में पसीने की वजह से बच्चे की त्वचा पर छोटे-छोटे लाल दाने निकल आते हैं, जिन्हें घमौरियां कहा जाता है। इसके अलावा देर तक पसीने वाले गीले कपड़े पहने रहने की वजह से फंगल इंफेक्शन भी हो सकता है। तेज धूप के संपर्क में आने से सनबर्न की भी समस्या हो सकती है। इससे त्वचा की रंगत काली पड़ जाती है।
3. पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याएं: इस मौसम में बच्चों को गैस्ट्रोएंटेराइटिस, लूज मोशन,वॉमिटिंग और फूडप्वॉइजनिंगजैसी समस्याएं भी परेशान कर सकती हैं। गर्मियों में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं, इसलिए खाने-पीने की चीजें जल्दी दूषित हो जाती हैं, जो बीमारी का कारण बन जाती हैं। स्कूल जाने वाले बच्चे घर से बाहर खुले में बिकने वाली चाट, पकौड़ी, कटे फल, लस्सी, जूस और शर्बत जैसी चीजें खाते-पीते हैं, जिससे उनके पेट और गले में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
टाइफाइड के मामले भी इस मौसम में ज्यादा सामने आते हैं। इस मौसम में मच्छर भी तेजी से पनपते हैं, इसलिए बच्चों को डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियां भी परेशान करती हैं। इसी मौसम में वायरल फीवर और चिकन पॉक्स की भी आशंका बढ़ जाती है। गर्मी से राहत के लिएकई बच्चे स्विमिंग पूल में जाते हैं, जिससे कई बार उनके कान में इंफेक्शन भी हो जाता है। उनकी आंखों में कंजंक्टिवाइटिस की भी समस्या हो सकती है।
कैसे करें बचाव
- -बच्चों कोलूज कॉटन और आरामदेह ड्रेस पहनाएं। बेहतर यही होगा कि स्कूल जाने वाले बच्चों को फुल स्लीव्स वाले ड्रेस पहनाएं। यह तरीका मच्छरों और टैनिंग से बचाव में मददगार होगा।
- -आजकल बच्चों के लिए अलग सनस्क्रीन आती हैं, जब बच्चे धूप में घर से बाहर जाएं तो उनके शरीर के खुले हिस्से पर सनस्क्रीन लगाना न भूलें।
- -स्ट्रीट फूड से बीमारियों और संक्रमण का सबसे अधिक खतरा होता है, इसलिए बच्चों पर इस बात की पूरी निगरानी रखें कि वे बाहर खुले में बिकने वाली चीजें न खाएं।
- -घर पर रोजाना ताजा भोजन बनाकर उन्हें खिलाएं। फ्रिज में रखी बासी और ठंडी चीजें सेहत के लिए नुकसानदेह होती हैं।
- -दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक तेज धूप होती है। इस दौरान बच्चों को खेलने के लिए घर से बाहर न भेजें। जब बच्चे को घर से बाहर निकलना हो उससे आधे घंटे पहले कमरे का एसी ऑफ कर दें।
- -बच्चे जब भी घर से बाहर जाएं, उनके साथ पानी की बॉटल जरूर दें।
- -अगर आप बच्चे को स्विमिंग के लिए भेजती हैं, तो पूल के सफाई व्यवस्था की जांच अवश्य करें।
- -बच्चों को ज्यादा पानी पीने के लिए प्रेरित करें। उनकी डाइट में ताजा मौसमी फलों, छाछ, लस्सी और जूस जैसे तरल पदार्थों की मात्रा बढ़ाएं लेकिन बाजार में बिकने वाले डिब्बाबंद जूस न दें। यह सेहत के लिए बहुत नुकसानदेह होता।
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