बाजार की पाठशाला: इन 5 बैंकों में बच्चों के लिए खुलवाएं स्पेशल अकाउंट, पैरेंट्स के पास रहेगा पूरा कंट्रोल
Zero Balance Savings Account For Kids: पैसे की अहमियत और बचत की आदत एक ऐसी सीख है जो बच्चों के सुनहरे भविष्य की नींव रखती है. आज के डिजिटल दौर में माता-पिता अपने बच्चों को छोटी उम्र से ही आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और जिम्मेदार बनाना चाहते हैं. इसी जरूरत को समझते हुए देश के कई बड़े और प्रतिष्ठित बैंक बच्चों और किशोरों के लिए खास जीरो बैलेंस सेविंग अकाउंट की सुविधा लेकर आए हैं. इन विशेष खातों की मदद से बच्चे न सिर्फ अपनी पॉकेट मनी और उपहार में मिले पैसों को सुरक्षित रख सकते हैं, बल्कि वे बैंकिंग की बारीकियों और वित्तीय अनुशासन को भी करीब से समझ सकते हैं.
खातों के मुख्य फीचर्स और पैरेंटल कंट्रोल
इन माइनर अकाउंट्स को इस तरह डिजाइन किया गया है कि बच्चों को आजादी भी मिले और सुरक्षा भी बनी रहे. इनमें पैरेंटल कंट्रोल यानी माता-पिता की निगरानी, डेबिट कार्ड, मोबाइल बैंकिंग और खर्च की एक निश्चित सीमा जैसी बेहतरीन सुविधाएं दी जाती हैं. इससे अभिभावक अपने बच्चों की हर वित्तीय गतिविधि पर पूरी तरह नजर रख सकते हैं. माता-पिता बच्चों के इन खातों में उनकी मासिक पॉकेट मनी, त्योहारों या रिश्तेदारों से मिले उपहार और पुरस्कार की राशि जमा कर सकते हैं, जो समय के साथ ब्याज के रूप में बढ़ती रहती है.
कोटक महिंद्रा और बैंक ऑफ बड़ौदा के खास ऑफर
कोटक महिंद्रा बैंक बच्चों के लिए 'कोटक माय जूनियर अकाउंट' की शानदार सुविधा देता है. यह खाता 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए है और इसमें कोई न्यूनतम बैलेंस रखने का दबाव नहीं होता है. बच्चों को एक पर्सनलाइज्ड जूनियर डेबिट कार्ड दिया जाता है, जिसकी एटीएम निकासी सीमा पहले से तय होती है ताकि वे फालतू खर्च न कर सकें. इस खाते पर आकर्षक ब्याज के साथ शॉपिंग, फूड और एजुकेशन से जुड़े कई डिस्काउंट भी मिलते हैं.
दूसरी तरफ, बैंक ऑफ बड़ौदा का 'बड़ौदा चैंप अकाउंट' भी एक बहुत लोकप्रिय विकल्प है. 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए उपलब्ध इस जीरो बैलेंस खाते की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें स्कूल फीस के भुगतान पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगता है. साथ ही फीस जमा करने के लिए हर महीने एक फ्री डिमांड ड्राफ्ट भी मिलता है. 10 साल से बड़े बच्चों को आकर्षक थीम वाला रुपे डेबिट कार्ड और मोबाइल बैंकिंग मिलती है. इस खाते में अधिकतम 1 लाख रुपए तक की राशि जमा रखी जा सकती है.
इंडसइंड और एचडीएफसी बैंक की बेहतरीन योजनाएं
इंडसइंड बैंक बच्चों में बचत को बढ़ावा देने के लिए 'इंडस यंग सेवर अकाउंट' की पेशकश करता है. यह खाता 10 साल से अधिक उम्र के बच्चों के लिए है, जिसे बच्चा खुद या अपने माता-पिता की देखरेख में चला सकता है. इसके साथ कस्टमाइज्ड डेबिट कार्ड, ऑनलाइन शॉपिंग की सुविधा और पर्सनल चेकबुक दी जाती है.
इसी कड़ी में एचडीएफसी बैंक का 'किड्स एडवांटेज अकाउंट' भी माता-पिता के बीच काफी पसंद किया जाता है. इसमें पैरेंट्स बच्चों के खर्च की दैनिक सीमा तय कर सकते हैं और हर ट्रांजैक्शन को ट्रैक कर सकते हैं. एटीएम निकासी, एसएमएस अलर्ट और नेट बैंकिंग के साथ-साथ यह बैंक बच्चों को एक विशेष शिक्षा बीमा कवर भी देता है, ताकि किसी भी अनहोनी की स्थिति में बच्चे की पढ़ाई में कोई रुकावट न आए.
आईडीबीआई बैंक और एक्सपर्ट्स की राय
आईडीबीआई बैंक भी बच्चों के लिए 'किड्स सेविंग अकाउंट' की सुविधा प्रदान करता है. इस खाते में बच्चों को एक विशेष डिजाइन वाला एटीएम कार्ड और चेकबुक दी जाती है. हालांकि, इस खाते में न्यूनतम औसत बैलेंस रखने की एक शर्त होती है, लेकिन बच्चों को बैंकिंग की शुरुआती समझ देने के लिए इसे बहुत उपयोगी माना जाता है. इसमें भी खर्च पर नियंत्रण रखने के लिए लिमिट तय रहती है.
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को बचपन से ही बैंकिंग और पैसों के प्रबंधन का व्यावहारिक अनुभव देना उन्हें भविष्य में एक जिम्मेदार नागरिक बनाता है. डिजिटल युग के यह सेविंग अकाउंट्स बच्चों को सुरक्षित तरीके से पैसों का सही इस्तेमाल करना सिखाने का सबसे अच्छा माध्यम हैं.
स्त्रोत- IANS
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बांग्लादेशी और रोहिंग्याओं पर शुभेंदु सरकार का बड़ा फैसला, डिपोर्ट करने के लिए होगी ये व्यवस्था
पश्चिम बंगाल में शुभेंदु सरकार ने घुसपैठियों पर बड़ा फैसला लिया है। पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों पर सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को वापस उनके देश भेजने के लिए विशेष 'होल्डिंग सेंटर' बनाने के निर्देश जारी किए हैं।
पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों, खासकर बांग्लादेशी और रोहिंग्या प्रवासियों को वापस भेजने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए सरकार ने स्पेशल होल्डिंग सेंटर बनाने के निर्देश दिए हैं। सभी डीएम को इन सेंटरों के लिए उपयुक्त जगह चिन्हित कर कार्रवाई शुरू करने को कहा गया है।
शुभेंदु सरकार ने अवैध प्रवासियों के लिए होल्डिंग सेंटर बनाने को लेकर पश्चिम बंगाल के सभी जिलाधिकारियों को लिखित निर्देश और गाइडलाइंस जारी कर दी हैं। DM को अपने-अपने जिलों में सेंटर के लिए उपयुक्त जगह चिन्हित कर तुरंत आगे की कार्रवाई शुरू करने को कहा गया है। प्रशासन का खास फोकस सीमावर्ती जिलों और उन इलाकों पर है जहां अवैध प्रवासियों के छिपे होने की आशंका ज्यादा है।
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डिपोर्ट होने तक यहीं रहेंगे घुसपैठिए
सरकार जो होल्डिंग सेंटर बना रही है, उनका मकसद अवैध रूप से रह रहे लोगों पर कड़ी निगरानी रखना है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से पकड़े गए अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को सीधे जेल भेजने के बजाय इन सेंटरों में ट्रांसफर किया जाएगा। इन्हें डिपोर्ट करने तक यहीं रखा जाएगा। पकड़े गए विदेशी नागरिकों को तब तक होल्डिंग सेंटरों में रखा जाएगा जब तक उनकी पहचान की पुष्टि और कानूनी रूप से मूल देश वापस भेजने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती।
बीजेपी ने चुनाव में बनाया था मुद्दा
गौरतलब है कि बीजेपी ने इसी साल बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान राज्य से अवैध प्रवासियों को बाहर निकालने का वादा किया था। अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा था कि जिस तरह असम में घुसपैठ खत्म की गई, वैसे ही बंगाल में भी अवैध घुसपैठ पूरी तरह खत्म की जाएगी। अब राज्य में बीजेपी सरकार बनने के बाद पार्टी अपने उसी वादे को पूरा करने में जुट गई है।
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