सीढ़ियों के नीचे टॉयलेट बनवाने से पहले जान लें ये वास्तु नियम, वरना घर में बढ़ सकती हैं परेशानियां
आजकल छोटे घरों और फ्लैट्स में जगह की कमी सबसे बड़ी समस्या बन गई है। ऐसे में लोग घर के हर कोने का इस्तेमाल करना चाहते हैं। इसी वजह से कई लोग सीढ़ियों के नीचे खाली जगह में टॉयलेट या बाथरूम बनवा लेते हैं। देखने में यह जगह का अच्छा उपयोग लगता है, लेकिन कई लोगों के मन में सवाल रहता है कि क्या वास्तु शास्त्र के अनुसार ऐसा करना सही है या नहीं।
वास्तु एक्सपर्ट्स का मानना है कि सीढ़ियों के नीचे टॉयलेट बनाना पूरी तरह गलत नहीं माना जाता लेकिन इसकी दिशा सबसे ज्यादा मायने रखती है। अगर सही दिशा में टॉयलेट बनाया गया है तो इसका बुरा असर नहीं पड़ता, लेकिन गलत दिशा में बना टॉयलेट घर की सुख-शांति और आर्थिक स्थिति दोनों को प्रभावित कर सकता है।
सही दिशा में बना टॉयलेट नहीं देता नकारात्मक असर
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में हर दिशा का अलग महत्व होता है। इसी कारण सीढ़ियों के नीचे टॉयलेट बनाते समय दिशा का ध्यान रखना बेहद जरूरी माना जाता है। अगर आपके घर की सीढ़ियां उत्तर-पश्चिम दिशा में बनी हैं, तो वहां टॉयलेट बनवाना ठीक माना जाता है। इसके अलावा पश्चिम और दक्षिण दिशा में सीढ़ियों के नीचे टॉयलेट बनाना भी वास्तु के अनुसार सामान्य माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन दिशाओं में बना टॉयलेट घर की आर्थिक स्थिति पर कोई नकारात्मक असर नहीं डालता। साथ ही परिवार में तनाव और कलह की संभावना भी कम रहती है।
इन दिशाओं में भूलकर भी न बनवाएं टॉयलेट
वास्तु शास्त्र में कुछ दिशाओं को बेहद संवेदनशील माना गया है। अगर इन दिशाओं में सीढ़ियों के नीचे टॉयलेट बनाया जाए, तो इसका असर घर के लोगों की तरक्की और मानसिक शांति पर पड़ सकता है।
सबसे पहले ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा की बात करें, तो इस दिशा को भगवान की दिशा माना जाता है। वास्तु के अनुसार यहां टॉयलेट बनाना शुभ नहीं माना जाता। ऐसा करने से आर्थिक नुकसान, मानसिक तनाव और घर में नकारात्मकता बढ़ सकती है।
इसके अलावा दक्षिण-पश्चिम दिशा में भी सीढ़ियों के नीचे टॉयलेट बनवाने से बचना चाहिए। माना जाता है कि इससे परिवार के रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है और घर में विवाद की स्थिति बन सकती है। वहीं दक्षिण-पूर्व दिशा में बना टॉयलेट स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का कारण बन सकता है।
क्यों जरूरी है वास्तु के अनुसार घर का निर्माण?
भारतीय घरों में वास्तु शास्त्र को लंबे समय से महत्व दिया जाता रहा है। लोग मानते हैं कि घर की दिशा और बनावट का असर वहां रहने वाले लोगों के जीवन पर पड़ता है। इसी वजह से घर बनवाते समय रसोई, पूजा घर, बेडरूम और टॉयलेट की दिशा का विशेष ध्यान रखा जाता है।
हालांकि वास्तु को पूरी तरह विज्ञान नहीं माना जाता, लेकिन बहुत से लोग इसे सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक संतुलन से जोड़कर देखते हैं। इसलिए अगर आप नया घर बना रहे हैं या घर में बदलाव करने की सोच रहे हैं, तो वास्तु विशेषज्ञ की सलाह लेना फायदेमंद हो सकता है।
Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News न्यूज़ नहीं करता।
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