तमिलनाडु में डीएमके नेता और युवा विंग के सचिव उदयनिधि स्टालिन ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। यह विवाद तब शुरू हुआ, जब कांग्रेस ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पार्टी टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार को अपना समर्थन दे दिया। उदयनिधि ने पार्टी के एक कार्यक्रम में कहा कि डीएमके को कांग्रेस पर दोबारा कभी भरोसा नहीं करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि डीएमके कार्यकर्ताओं की मेहनत और एमके स्टालिन के नेतृत्व की वजह से सीटें जीतने के बावजूद, कांग्रेस नेताओं में बुनियादी अहसानमंदी और शिष्टाचार की कमी है।
उदयनिधि ने कहा, हमें बिना बताए ही भाग गए
उदयनिधि स्टालिन ने कांग्रेस पर धोखा देने का आरोप लगाते हुए कहा, "कांग्रेस के पांच विधायकों की जीत डीएमके कार्यकर्ताओं की वजह से हुई थी। जनता ने उन्हें इसलिए वोट दिया क्योंकि वे एमके स्टालिन को मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे। लेकिन आज कुछ पदों के लालच में वे हमें बिना बताए ही भाग गए। हमें कांग्रेस पर कभी भरोसा नहीं करना चाहिए। तमिलनाडु की जनता बहुत जल्द उन्हें एक करारा सबक सिखाएगी।"
उदयनिधि का आरोप, कांग्रेस की वजह से देश में बीजेपी बढ़ी
उन्होंने पूरे देश में भाजपा के आगे बढ़ने के लिए भी कांग्रेस को ही जिम्मेदार ठहराया। उदयनिधि स्टालिन ने कहा, "पहले मुझे लगता था कि देश में बीजेपी की जीत की वजह प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह हैं। लेकिन अब यह साफ हो गया है कि भारत में बीजेपी के उभरने की असली वजह कांग्रेस की कमजोरियां हैं। हमारे नेता एमके स्टालिन ने पिछले चुनावों में कांग्रेस को अपने कंधों पर उठाया था, लेकिन उन्होंने हमारे साथ धोखा किया।"
डीएमके ने कांग्रेस को बताया 'जोंक'
यह बयान डीएमके और कांग्रेस के बीच लगातार बढ़ रही कड़वाहट को दिखाता है। डीएमके की बैठक के दौरान कुछ प्रस्ताव भी पास किए गए, जिनमें कांग्रेस को पीठ में छुरा घोंपने वाला और सहयोगियों की मेहनत पर पलने वाला जोंक कहा गया। इसके साथ ही, उदयनिधि ने अपनी पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे नए और पहली बार वोट देने वाले युवाओं के बीच जाकर उन्हें राजनीति के प्रति जागरूक करें।
किसी भी दिन सरकार गिर जाने की भविष्यवाणी
दूसरी तरफ, डीएमके अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने दावा किया है कि टीवीके सरकार अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएगी। स्टालिन ने कहा, "उनके पास कुल 120 विधायकों का ही समर्थन है। अपनी संख्या बढ़ाने के लिए उन्होंने एआईएडीएमके को तोड़ने की कोशिश की, लेकिन वे नाकाम रहे। उनकी हालत आज 'दीवार पर बैठी बिल्ली' जैसी है। यह सरकार किसी भी दिन गिर जाएगी।"
अन्य सहयोगी दलों की भी आलोचना की
एमके स्टालिन ने उन वामपंथी और अन्य क्षेत्रीय दलों (सीपीआई, सीपीएम, वीसीके और आईयूएमएल) की भी आलोचना की, जो पहले सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे थे लेकिन अब मंत्रिमंडल में शामिल हो गए हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "जैसे बच्चे कुछ ही दिनों में नए खिलौनों से ऊब जाते हैं, वैसे ही तमिलनाडु के लोग भी इस अभिनेता (विजय) के शासन से बहुत जल्द ऊब जाएंगे। तब वे दोबारा हमारे पास वैसे ही लौटेंगे, जैसे बच्चे अपनी मां के पास लौटते हैं।"
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असम के कई जिलों में मस्जिद समितियों ने एक बड़ा फैसला लेते हुए घोषणा की है कि आगामी 28 मई को आने वाली बकरीद पर गाय की कुर्बानी नहीं दी जाएगी। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस कदम की सराहना करते हुए इसे एक स्वैच्छिक निर्णय बताया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला बहुसंख्यक समुदाय की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करता है।
पूर्व विधायक की गिरफ्तारी के बीच फैसला
मस्जिद समितियों की यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब शनिवार को धुबरी के पूर्व विधायक अली अकबर मियां को गिरफ्तार किया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर एक विवादित पोस्ट शेयर की थी, जिसमें अधिकारियों को कुर्बानी में दखल न देने की चेतावनी दी गई थी और ऐसा करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की बात कही गई थी। इसके साथ ही, उन्होंने मुख्यमंत्री के खिलाफ भी अभद्र टिप्पणी की थी।
मुख्यमंत्री ने की फैसले की सराहना
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गोकशी के खिलाफ मस्जिदों द्वारा की गई इस अपील की खुलकर तारीफ की। उन्होंने इसके कानूनी और धार्मिक पहलुओं को समझाते हुए कहा कि ऐसे कदम समाज में सांप्रदायिक सद्भाव को और मजबूत करेंगे। सीएम सरमा ने सोशल मीडिया पर इस फैसले से जुड़ी खबरों की कतरनें साझा करते हुए लिखा, "मैं इस प्रयास का स्वागत करता हूं। मुझे उम्मीद है कि अन्य समितियां भी इसी तरह की अपील जारी करेंगी।"
असम मवेशी संरक्षण अधिनियम का संदर्भ
मस्जिद समितियों की ओर से यह अपील असम मवेशी संरक्षण अधिनियम, 2021 के लागू नियमों के बीच आई है। यह कानून राज्य में बीफ के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध तो नहीं लगाता, लेकिन मवेशियों के वध और उनके व्यापार पर कुछ सीमाएं जरूर तय करता है। इस अधिनियम के तहत मवेशियों की कुर्बानी के लिए पहले से अनुमति लेने और उनके अवैध परिवहन को रोकने के लिए बेहद कड़े नियम बनाए गए हैं।
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