Heatwave में खूब खाएं बर्फ जैसा दिखने वाला ये फल, पाचन होगा बेहतर और शरीर रहेगा कूल
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Astro Tips: क्या आप भी घर से निकलते समय रखते हैं गलत कदम? शुभ काम पर जाने से पहले जानें सही तरीका
किसी जरूरी या शुभ काम के लिए घर से निकलते समय लोग कई तरह के उपाय करते हैं. कोई भगवान का नाम लेकर बाहर जाता है तो कोई दही-चीनी खाकर शुभ काम की शुरुआत करता है. वहीं कई लोग इस बात पर भी ध्यान देते हैं कि घर से बाहर निकलते समय पहले कौन सा पैर रखना चाहिए. स्वर विज्ञान में इस विषय को काफी जरूरी माना गया है. इसमें शरीर को केवल हड्डियों और मांसपेशियों का ढांचा नहीं, बल्कि ऊर्जा का केंद्र माना गया है. इसी ऊर्जा के संतुलन से व्यक्ति के विचार, व्यवहार और निर्णय प्रभावित होते हैं.
क्या है स्वर विज्ञान?
स्वर विज्ञान प्राचीन योग परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसमें सांसों के प्रवाह और शरीर की नाड़ियों के आधार पर जीवन को संतुलित रखने की बात कही गई है. मान्यता है कि मानव शरीर में 72 हजार नाड़ियां होती हैं. इनमें इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना सबसे प्रमुख मानी जाती हैं. ये नाड़ियां मानसिक स्थिति, ऊर्जा और कार्यक्षमता को प्रभावित करती हैं.
इड़ा नाड़ी क्या होती है?
इड़ा नाड़ी को चंद्र नाड़ी भी कहा जाता है. यह शरीर के बाएं हिस्से से जुड़ी मानी जाती है. इसका संबंध शांति, ठंडक, भावनाओं और मानसिक स्थिरता से होता है. जब इड़ा नाड़ी सक्रिय होती है तो व्यक्ति शांत स्वभाव का रहता है. सोचने-समझने की क्षमता बेहतर होती है और मन संतुलित रहता है. इसे चंद्र ऊर्जा का प्रतीक माना गया है.
पिंगला नाड़ी का महत्व
पिंगला नाड़ी को सूर्य नाड़ी कहा जाता है. यह शरीर के दाएं भाग से संबंधित होती है. इसका प्रभाव ऊर्जा, आत्मविश्वास, सक्रियता और निर्णय लेने की क्षमता पर माना जाता है. जब पिंगला नाड़ी सक्रिय रहती है तो व्यक्ति ज्यादा ऊर्जावान महसूस करता है. काम करने की गति बढ़ती है और आत्मविश्वास मजबूत होता है. इसे सूर्य ऊर्जा का वाहक माना जाता है.
नाड़ियों का संतुलन क्यों जरूरी है?
स्वर विज्ञान के अनुसार इड़ा और पिंगला नाड़ियों का संतुलन बेहद जरूरी है. यही संतुलन मानसिक शांति और अच्छे स्वास्थ्य का आधार माना जाता है. यदि दोनों नाड़ियां संतुलित रहें तो व्यक्ति का मन और शरीर सामंजस्य में रहता है. लेकिन असंतुलन होने पर व्यक्ति कभी ज्यादा भावुक तो कभी अत्यधिक गुस्सैल हो सकता है.
शुभ काम से पहले कैसे करें नाड़ी की पहचान?
स्वर विज्ञान के अनुसार किसी महत्वपूर्ण काम के लिए निकलने से पहले अपनी सक्रिय नाड़ी को पहचानना चाहिए.इसके लिए सुबह उठने के बाद नाक के नीचे हाथ रखें और महसूस करें कि किस नथुने से सांस ज्यादा चल रही है. यदि बाएं नथुने से सांस तेज चल रही हो तो इड़ा नाड़ी सक्रिय मानी जाती है. यदि दाएं नथुने से सांस अधिक चल रही हो तो पिंगला नाड़ी सक्रिय मानी जाती है.
घर से निकलते समय कौन सा कदम रखें पहले?
मान्यता है कि जिस नाड़ी का प्रवाह सक्रिय हो, उसी तरफ का पैर पहले बाहर रखना शुभ माना जाता है. अगर बाएं नथुने से सांस चल रही है तो बायां पैर पहले बाहर रखें. वहीं, यदि दाएं नथुने से सांस अधिक चल रही हो तो दायां पैर पहले आगे बढ़ाएं. ऐसा करते समय धीरे-धीरे सांस अंदर खींचते हुए कदम बढ़ाने की सलाह दी जाती है. माना जाता है कि इससे कार्यों में सफलता मिलने की संभावना बढ़ती है.
किन कामों में अपनाई जाती है यह विधि?
स्वर विज्ञान में इस नियम को सिर्फ घर से बाहर निकलने तक सीमित नहीं माना गया है. किसी नए काम की शुरुआत, ऑफिस में प्रवेश, पूजा-पाठ, स्वस्तिक बनाने या किसी शुभ कार्य से पहले भी इस विधि को अपनाने की बात कही जाती है. मान्यता है कि सही नाड़ी और सही कदम के साथ शुरुआत करने से मन में आत्मविश्वास आता है और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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