खत्म होगा पश्चिम एशिया संघर्ष? अमेरिका का बड़ा दावा- संवर्धित यूरेनियम सौंपने पर सहमत ईरान, खुल सकता है होर्मुज
पश्चिम एशिया में पिछले काफी लंबे समय से जारी भीषण सैन्य संघर्ष और तनाव के बीच वैश्विक स्तर राहत भरी खबर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख और लगातार मिल रही सैन्य चेतावनियों के बाद आखिरकार ईरान झुकता हुआ नजर आ रहा है।
अमेरिकी अधिकारियों और वैश्विक खुफिया इनपुट्स के हवाले से दावा किया गया है कि ईरान अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम भंडार को एक अंतरराष्ट्रीय समझौते के तहत सौंपने के लिए कड़े तौर पर सहमत हो गया है।
Iran agreed to give up enriched uranium in deal announced by Trump, say US officials https://t.co/zsFkdgWPbs
— The Straits Times (@straits_times) May 24, 2026
इस संभावित समझौते को पश्चिम एशिया में युद्ध की समाप्ति और वैश्विक व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण रूट 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को दोबारा पूरी तरह सुरक्षित खोलने की दिशा में एक टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है।
BREAKING: IRAN AGREES TO GIVE UP ENRICHED URANIUM @nytimes REPORTS
— Discover Crypto (@DiscoverCrypto) May 24, 2026
“Washington would walk away from talks and resume military ops if no commitment from Tehran”
So reports deal is made, but still waiting for confirmation this isn’t just another ping pong announcement. https://t.co/8rIRwbQW4q pic.twitter.com/fNVOGGZgaD
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा एलान, लेकिन अमेरिकी अधिकारी अनिश्चित
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे कूटनीतिक घटनाक्रम को लेकर शनिवार को एक बड़ा एलान किया था। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका अब ईरान के साथ जारी इस लंबे युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को शांतिपूर्वक फिर से खोलने की दिशा में एक बेहद बड़े समझौते के बिल्कुल करीब पहुंच चुका है। हालांकि, इस सौदे को लेकर अभी भी पूर्ण अनिश्चितता बरकरार है। वाशिंगटन और व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अभी तक इस सौदे को अंतिम रूप देने में आ रही बाधाओं का कोई सार्वजनिक विवरण साझा नहीं किया है।
यूरेनियम सौंपने के तरीके पर परमाणु वार्ता में होगी चर्चा
'न्यूयॉर्क टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा घोषित इस कड़े समझौते के तहत अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार को किसी तीसरे देश या अंतरराष्ट्रीय एजेंसी को सौंपने पर सैद्धांतिक सहमति तो दे दी है, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अभी यह तकनीकी रूप से तय होना बाकी है कि ईरान इस संवेदनशील भंडार को किस तरह और किस समय सीमा के भीतर सौंपेगा। इस कूटनीतिक गतिरोध को दूर करने के लिए दोनों देशों के शीर्ष कूटनीतिज्ञों के बीच आगामी दिनों में एक उच्चस्तरीय 'परमाणु वार्ता' आयोजित की जाएगी।
अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की टीम के मुताबिक, ईरान की यह प्रतिबद्धता अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से एक बहुत बड़ी जीत है, जबकि ईरान की ओर से अभी तक इस समझौते पर कोई आधिकारिक या सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।
अमेरिका ने दी थी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी, इस्फहान परमाणु केंद्र था रडार पर
इस संभावित समझौते के पीछे अमेरिका का वो कड़ा सैन्य दबाव है, जिसने ईरान को बैकफुट पर आने के लिए विवश कर दिया। अमेरिकी वार्ताकारों ने मध्यस्थों के जरिए तेहरान को साफ संदेश दे दिया था कि अगर शुरुआत चरण में ही यूरेनियम भंडार को सौंपने पर आम सहमति नहीं बनी, तो अमेरिका तुरंत बातचीत छोड़कर ईरान के खिलाफ सीधी सैन्य कार्रवाई शुरू कर देगा।
अमेरिकी सैन्य योजनाकारों ने राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर ईरान के सबसे बड़े यूरेनियम भंडार और इस्फहान परमाणु स्थल पर हमले के कई सैन्य विकल्प भी तैयार कर लिए थे। गौरतलब है कि पिछले साल जून में इसी इस्फहान परमाणु केंद्र पर अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइलों से एक बड़ा और विनाशकारी हमला हुआ था, जिसके बाद से ही ईरान का यह पूरा सिस्टम दबाव में था।
होर्मुज खुलने से वैश्विक तेल बाजार और सप्लाई चेन को मिलेगी बड़ी राहत
यदि यह संभावित समझौता पूरी तरह धरातल पर उतरता है, तो इसके वैश्विक आर्थिक और कूटनीतिक मायने बेहद असाधारण होंगे। ओमान और ईरान के बीच स्थित 'होर्मुज जलडमरूमध्य' दुनिया का वह सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग है, जहां से वैश्विक बाजार का करीब एक-तिहाई कच्चे तेल का परिवहन होता है।
युद्ध के कारण इस रूट के बाधित होने से पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमतों में आग लगी हुई थी। इस समझौते के बाद जैसे ही यह जलमार्ग दोबारा खुलेगा, भारत सहित दुनिया भर के देशों के लिए कच्चे तेल की निर्बाध सप्लाई शुरू हो जाएगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मंदी व महंगाई के मोर्चे पर एक बहुत बड़ी राहत देखने को मिल सकती है।
कबरीद पर गाय की कुर्बानी को लेकर असम के मुसलमानों ने पेश की मिसाल, हिमंत सरमा भी खुश
कमेटी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस्लाम में गाय की ही कुर्बानी देना अनिवार्य नहीं है। हालांकि पारंपरिक रूप से असम में यह आसानी से उपलब्ध थी, लेकिन इस्लामिक न्यायशास्त्र के अनुसार अन्य जानवरों की कुर्बानी दी जा सकती है।
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