नवीकरणीय ऊर्जा में आगे बढ़ा मध्य प्रदेश, मुंबई सम्मेलन में सीएम मोहन यादव का रोडमैप
मोहन यादव ने मुंबई में आयोजित नवीकरणीय ऊर्जा सम्मेलन में हिस्सा लेकर मध्य प्रदेश की ऊर्जा नीति और संभावनाओं को वैश्विक मंच पर रखा. ‘247 रिवीजन टू रियलिटी मध्य प्रदेश जर्नी’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने राज्य को ऊर्जा क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार 24 घंटे सस्ती और स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराने के लिए सोलर और बैटरी स्टोरेज आधारित मॉडल पर तेजी से काम कर रही है.
सोलर और पवन ऊर्जा में तेज वृद्धि
राज्य में बीते 12 वर्षों में सौर ऊर्जा उत्पादन में 48 प्रतिशत और पवन ऊर्जा उत्पादन में 19 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है. सोलर, विंड और पंप स्टोरेज सहित सभी नवीकरणीय स्रोतों में मध्य प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है. विशेष रूप से Omkareshwar Floating Solar Project को दुनिया की सबसे बड़ी फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं में गिना जा रहा है. इसके अलावा 300 मेगावाट सौर ऊर्जा स्टोरेज की दो परियोजनाओं पर भी कार्य जारी है.
बैटरी स्टोरेज में देश की पहली पहल
मुख्यमंत्री ने बताया कि बैटरी आधारित ऊर्जा भंडारण परियोजना पर भी काम हो रहा है, जिसे देश में अपनी तरह की पहली पहल माना जा रहा है. इससे सोलर ऊर्जा को 24 घंटे उपयोग में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी. उन्होंने कहा कि राज्य सस्ती नवीकरणीय बिजली उपलब्ध कराने के मामले में अग्रणी स्थिति में पहुंच रहा है, जिससे उद्योग और निवेश दोनों को बढ़ावा मिलेगा.
निवेशकों को भरोसे का संदेश
सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि मध्य प्रदेश में हर निवेश सुरक्षित रहेगा और सरकार अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरी गंभीरता से निभाएगी. उन्होंने कहा कि औद्योगीकरण, एमएसएमई और हेवी इंडस्ट्री के क्षेत्र में भी राज्य तेज गति से आगे बढ़ रहा है. उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी राज्य में निवेश के लिए भरोसा सबसे महत्वपूर्ण कारक होता है. राज्य सरकार पारदर्शी नीतियों और प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से निवेशकों के विश्वास को मजबूत कर रही है.
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भूख नहीं लगना आम बात है या चेतावनी? जानें इसके कारण
नई दिल्ली, 20 फरवरी (आईएएनएस)। आजकल कई लोगों में भूख न लगने की समस्या आम हो गई है। कभी-कभी इसे हम थकान या व्यस्त दिनचर्या का असर समझकर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन अगर यह परेशानी लगातार बनी रहे तो यह शरीर के लिए खतरनाक संकेत हो सकता है। आयुर्वेद और विज्ञान दोनों मानते हैं कि भूख न लगना शरीर में असंतुलन या किसी परेशानी का संकेत हो सकता है।
आयुर्वेद के अनुसार, पाचन शक्ति कमजोर होने पर भोजन में रुचि कम हो जाती है। वहीं, विज्ञान मानता है कि हार्मोनल बदलाव, तनाव या बीमारी के कारण मस्तिष्क और पेट का सिग्नल सही तरीके से काम नहीं कर पाता, जिससे भूख महसूस नहीं होती।
भूख न लगने के सबसे आम कारणों में से एक पाचन संबंधी समस्या है। अगर पेट में गैस, एसिडिटी, या कब्ज जैसी दिक्कतें हों तो शरीर खाना कम मांगता है। आयुर्वेद में इसे अजीर्ण के रूप में देखा जाता है, यानी जब पाचन सही ढंग से काम नहीं करता तो खाना खाने की इच्छा कम हो जाती है। पेट में भारीपन या जलन की समस्या भी होती है।
बीमारियां भी भूख न लगने का बड़ा कारण हैं। सर्दी-जुकाम, बुखार, वायरल इंफेक्शन, पेट की सूजन या फूड पॉइजनिंग जैसे हालात शरीर को कमजोर कर देते हैं। इस दौरान शरीर ऊर्जा बचाने की कोशिश करता है और भोजन को पचाने में समय नहीं लगाना चाहता, इसलिए भूख कम हो जाती है।
तनाव और मानसिक स्थिति का असर भी भूख पर पड़ता है। ज्यादा चिंता, डिप्रेशन, या उदासी हार्मोन को प्रभावित करती है। इस बदलाव की वजह से मस्तिष्क भूख सिग्नल नहीं पेट को भेज पाता। आयुर्वेद इसे मन-आहार के असंतुलन से जोड़ता है। जब मन परेशान होता है, तो शरीर का अग्नि कमजोर हो जाता है और खाने में रुचि कम हो जाती है।
कुछ दवाइयां भी भूख को प्रभावित करती हैं। उदाहरण के लिए, एंटीबायोटिक्स, कैंसर की दवाएं, दर्द निवारक और डिप्रेशन की दवाइयां शरीर की प्राकृतिक भूख कम कर सकती हैं। विज्ञान कहता है कि ये दवाइयां पेट और मस्तिष्क के बीच के हार्मोनल सिग्नल को बदल देती हैं, जिससे भूख महसूस नहीं होती।
अगर भूख न लगना कई दिन तक बना रहे, वजन घटने लगे, कमजोरी महसूस हो या शरीर में पोषण की कमी दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
--आईएएनएस
पीके/डीकेपी
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