कोडिंग और डेटा एनालिसिस में चैटजीपीटी के उपयोग में भारत सबसे आगे: ओपनएआई
नई दिल्ली, 20 फरवरी (आईएएनएस)। अमेरिका की दिग्गज कंपनी ओपनएआई ने शुक्रवार को कहा कि तकनीकी कार्यों के लिए चैटजीपीटी के उपयोग में भारत वैश्विक औसत से काफी आगे है। भारत में डेटा विश्लेषण का उपयोग वैश्विक औसत से लगभग चार गुना अधिक है, जबकि कोडिंग के लिए कोडेक्स का उपयोग करीब तीन गुना ज्यादा है।
कंपनी के अनुसार, भारतीय यूजर्स वैश्विक औसत की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक कोडिंग से जुड़े सवाल पूछते हैं और शिक्षा व सीखने से जुड़े लगभग दोगुने प्रश्न करते हैं।
भारत में काम से जुड़े उपयोग का स्तर भी वैश्विक औसत से अधिक है। भारत में लगभग 35 प्रतिशत उपयोग कार्य से संबंधित है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह लगभग 30 प्रतिशत है।
ऑफिस में लोग मुख्य रूप से ड्राफ्टिंग और एडिटिंग, तकनीकी सहायता, डिबगिंग और काम की गति बढ़ाने के लिए एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं।
वहीं, ऑफिस के बाहर लगभग 35 प्रतिशत संदेश व्यावहारिक मार्गदर्शन से जुड़े होते हैं, जबकि लगभग 20-20 प्रतिशत संदेश सामान्य जानकारी और लेखन कार्यों से संबंधित होते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि एआई का उपयोग सीखने, निर्णय लेने और व्यक्तिगत उत्पादकता बढ़ाने के लिए तेजी से बढ़ रहा है।
ओपनएआई के मुख्य अर्थशास्त्री रॉनी चटर्जी ने कहा, एआई को अपनाने की रफ्तार इतनी तेज है कि उसे माप पाना भी चुनौती बन गया है। सिग्नल्स हमारी कोशिश है कि वास्तविक आंकड़ों के आधार पर चर्चा हो, ताकि भारत में एआई पर बहस तथ्यों पर आधारित हो, न कि केवल प्रचार पर।
कंपनी के अनुसार, एआई का उपयोग युवा वर्ग में अधिक केंद्रित है। 18 से 24 वर्ष के लोग कुल संदेशों का लगभग आधा हिस्सा भेजते हैं, जबकि 18 से 34 वर्ष आयु वर्ग के लोग उपभोक्ता संदेशों का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा हैं।
इन रुझानों से संकेत मिलता है कि भारत में बड़े पैमाने पर एआई अपनाने के साथ-साथ उसका उन्नत और समझदारी भरा उपयोग भी हो रहा है, खासकर कोडिंग और डेटा एनालिसिस जैसे क्षेत्रों में।
विज्ञप्ति में आगे कहा गया है कि भौगोलिक रूप से देखें, तो कोडिंग क्षमताओं का सबसे अधिक उपयोग भारत के प्रमुख टेक्नोलॉजी हब में हो रहा है। तेलंगाना पहले स्थान पर है, उसके बाद कर्नाटक और तमिलनाडु का स्थान है।
भारत में चैटजीपीटी के साप्ताहिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं की संख्या 10 करोड़ (100 मिलियन) से अधिक हो गई है। इससे भारत अमेरिका के बाहर चैटजीपीटी का सबसे बड़ा बाजार बन गया है और कोडेक्स के लिए सबसे तेजी से बढ़ता बाजार भी है।
--आईएएनएस
डीबीपी/
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ईपीएफओ ने हायर पेंशन पर दी बड़ी राहत, 2014 से पहले विकल्प चुनने वाले कर्मचारियों को मिलेगा असली सैलरी के आधार पर पेंशन का लाभ
EPFO Pension: कर्मचारियों की पेंशन को लेकर लंबे समय से चल रहे भ्रम को दूर करते हुए Employees' Provident Fund Organisation (ईपीएफओ) ने बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है. संगठन ने साफ कहा है कि पूरी सैलरी के आधार पर पेंशन योगदान का पुराना विकल्प खत्म नहीं हुआ है. हालांकि यह कोई नई सुविधा नहीं है, बल्कि पहले से मौजूद व्यवस्था की बहाली है. इसका लाभ केवल उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा जिन्होंने वर्ष 2014 से पहले हायर पेंशन का विकल्प चुना था.
साल 2014 में केंद्र सरकार ने पेंशन योग्य सैलरी की अधिकतम सीमा 15,000 रुपये तय कर दी थी और न्यूनतम मासिक पेंशन 1,000 रुपये घोषित की थी. इसके बाद जिन कर्मचारियों की वास्तविक सैलरी 15,000 रुपये से ज्यादा थी, उनकी पेंशन की गणना भी इसी सीमा के आधार पर होने लगी. इससे रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन राशि कम हो गई.
क्या है नियम?
नियम के अनुसार कर्मचारी और कंपनी दोनों बेसिक सैलरी का 12-12 प्रतिशत भविष्य निधि में जमा करते हैं. कंपनी के हिस्से का एक भाग पेंशन योजना में जाता है. पहले सैलरी सीमा 6,500 रुपये थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 15,000 रुपये किया गया.
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अब ईपीएफओ ने स्पष्ट किया है कि जिन कर्मचारियों ने 2014 से पहले अधिक पेंशन का विकल्प चुना था, वे अपनी वास्तविक सैलरी पर योगदान जारी रख सकते हैं. हालांकि इसके लिए कंपनी की सहमति जरूरी होगी. इस फैसले से खासकर संगठित और सरकारी क्षेत्र के कर्मचारियों को राहत मिलेगी.
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