क्या है प्री-सीडिंग? जिसके कारण टीम इंडिया को टी-20 विश्व कप 2026 में हो सकता है भारी नुकसान
TWhat IS Pre Seeding In 20 World Cup 2026: टी-20 विश्व कप 2026 के सुपर-8 के मुकाबले 21 फरवरी से शुरू होने वाले हैं. पहला मैच पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के बीच खेला जाएगा. मगर, इससे पहले प्री-सीडिंग को लेकर काफी बवाल मचा हुआ है. जी हां, प्री-सीडिंग के लिए आईसीसी की जमकर आलोचना हो रही है. बताया जा रहा है कि इसके चलते भारतीय क्रिकेट टीम को नुकसान झेलना पड़ सकता है. तो आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि आखिर प्री-सीडिंग क्या है? इससे टीम इंडिया को कैसे नुकसान हो सकता है?
प्री-सीडिंग को लेकर मचा बवाल
T20 World Cup 2026 में इस बार 20 टीमों ने हिस्सा लिया था, जिन्हें 4 ग्रुप में बांटा गया था. हर ग्रुप की टॉप-2 टीमों ने सुपर-8 के लिए क्वालिफाई किया है. प्री सीडिंग के तहत आईसीसी ने टूर्नामेंट की शुरुआत से पहले ही शीर्ष स्थान पर रहने वाली टॉप टीमों के स्लॉट फिक्स कर दिए थे. जिन्हें A1, B1, C1, और D1 नाम दिए गए थे. इसकी वजह से भारत के सुपर-8 ग्रुप में वो सभी टीमें आई हैं, जो अपने ग्रुप में टॉप पर रहीं. वहीं दूसरे ग्रुप में सभी उन टीमों को जगह मिली टीमें आई है.
सेमीफाइनल से पहले बाहर हो जाएंगी 2 बेस्ट टीमें
प्री सीडिंग की वजह से भारतीय होने वाला सबसे बड़ा नुकसान ये है कि अब पहले राउंड में बेस्ट प्रदर्शन करने वाली 2 टीमें टूर्नामेंट से बाहर हो जाएंगी. दूसरी ओर जो टीम अपने ग्रुप में दूसरे नंबर पर रही होगी उनके पास अंतिम 4 में जाने का सुनहरा मौका है. इस लिहाज से सेमीफाइनल में 2 ऐसी टीमें होने वाली हैं जो अपने ग्रुप में दूसरे नंबर पर रहीं. यानि टॉप पर रहने वाली 2 टीमों को सभी मैच जीतने का फायदा नहीं बल्कि नुकसान हो गया है.
टीम इंडिया का सुपर-8 का शेड्यूल
टी-20 विश्व कप 2026 में विजयरथ पर सवार रहते हुए नीदरलैंड्स के साथ खेले जाने वाले आखिरी लीग मैच के बाद टीम इंडिया को सुपर-8 में 3 मैच खेलने होंगे. पहला मैच 22 फरवरी को साउथ अफ्रीका के साथ, दूसरा जिम्बाब्वे के साथ 26 फरवरी को और तीसरा मुकाबला वेस्टइंडीज के साथ 1 मार्च को खेलना होगा.
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सस्ता और शानदार: भारतीय इंजीनियरों के बनाए AI मॉडल की वैश्विक स्तर पर तारीफ
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को बताया कि नई दिल्ली में हुए 'India AI Impact Summit 2026' को पूरी दुनिया से जबरदस्त साथ मिला है. भारत ने एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) को लेकर जो 'MANAV' फॉर्मूला पेश किया है, उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है. दुनिया के बड़े देशों और जानकारों ने माना है कि भारत का एआई बनाने का तरीका इंसानों की भलाई और नैतिकता पर टिका है.
भारतीय इंजीनियरों का बजा डंका
प्रेस कॉन्फ्रेंस में वैष्णव ने कहा कि दुनिया भर के दिग्गज इस बात से हैरान थे कि भारतीय इंजीनियरों और वैज्ञानिकों ने कम संसाधनों के बावजूद इतने शानदार एआई मॉडल तैयार किए हैं. भारत पांच अलग-अलग लेवल पर अपने खुद के एआई मॉडल बना रहा है. उन्होंने साफ किया कि हमारी नीति आत्मनिर्भर बनने, डेटा को सुरक्षित रखने और पूरी दुनिया के साथ मिलकर चलने पर आधारित है.
युवाओं ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड
इस समिट का आयोजन दिल्ली के भारत मंडपम में किया गया था, जहां देश भर के युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. इस दौरान एक अनोखा रिकॉर्ड भी बना, जब करीब 2.5 लाख छात्रों ने एआई से जुड़ी एक्टिविटी में भाग लिया, जिसे 'गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड' में जगह मिली. मंत्री ने कहा कि अगर हमारे देश के युवा इस नई तकनीक में अपना भविष्य देखते हैं, तो वे नई-नई खोज करके देश को आगे ले जाएंगे. पूरे प्रोग्राम में कुल 5 लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए.
प्रधानमंत्री मोदी ने समझाया 'MANAV' का मतलब
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विजन की शुरुआत करते हुए बताया था कि 'MANAV' का हर अक्षर एक खास मकसद को दर्शाता है:
- M (Moral): यानी एआई सही और गलत के नियमों पर चले.
- A (Accountable):यानी काम की पूरी जिम्मेदारी तय हो.
- N (National): यानी देश का डेटा उसके असली मालिक के पास ही रहे.
- A (Accessible): यानी यह तकनीक हर किसी की पहुंच में हो.
- V (Verifiable):यानी सिस्टम की जांच और पहचान आसानी से हो सके.
पूरी मानवता के लिए भारत की पहल
यह समिट इसलिए भी खास है क्योंकि इसे पिछड़ रहे देशों (ग्लोबल साउथ) की आवाज माना जा रहा है. भारत का मकसद 'सबका भला' और 'इंसानियत के लिए एआई' है. इस सम्मेलन के जरिए भारत ने दुनिया को दिखा दिया है कि वह सुरक्षित और सबको साथ लेकर चलने वाली तकनीक बनाने में सबसे आगे है.
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