AI Impact Summit | Shashi Tharoor ने एआई शिखर सम्मेलन की सराहना की, बड़े आयोजनों में छोटी-मोटी गड़बड़ियों को सामान्य बताया
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ की सराहना करते हुए इसे एक बड़ी सफलता बताया है। बृहस्पतिवार को मीडिया से बातचीत के दौरान थरूर ने कहा कि शिखर सम्मेलन के शुरुआती दिन ‘‘बेहद सफल’’ रहे और वैश्विक स्तर के इतने बड़े आयोजनों में ‘‘कुछ छोटी-मोटी गड़बड़ियां’’ होना एक सामान्य बात है। थरूर ने कहा कि राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों और वैश्विक नेताओं की उपस्थिति प्रभावशाली रही, जो यह संदेश देना चाहते हैं कि कृत्रिम मेधा (एआई) के विकास में दुनिया एक नयी दिशा में आगे बढ़े।
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थरूर ने कहा कि शिखर सम्मेलन के शुरुआती दिन “बेहद अच्छे” रहे, लेकिन “कुछ गड़बड़ियां” हुई हैं, जो बड़े आयोजनों में आम बात है। उनकी यह टिप्पणी कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के उस बयान के बाद आई जिसमें उन्होंने एआई शिखर सम्मेलन को “अव्यवस्थित प्रचार कार्यक्रम” कहा और आरोप लगाया कि वहां चीनी उत्पाद प्रदर्शित किए जा रहे हैं।
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नारायण गुरु पर अपनी नयी पुस्तक के विमोचन के दौरान थरूर ने कहा कि उन्हें शिखर सम्मेलन में जाने का अवसर अभी नहीं मिला, लेकिन वह कल वहां भाषण देंगे। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा राफेल जेट खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ कंपोनेंट पर टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर थरूर ने कहा कि कुछ हिस्से भारत में निर्मित किए जा रहे हैं। उन्होंने इसे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और देश की सुरक्षा मजबूत करने वाला पहलू बताया।
'केरल स्टोरी-2' पर तीखी प्रतिक्रिया
जब उनसे आगामी फिल्म ‘केरल स्टोरी-2’ के बारे में पूछा गया, तो थरूर ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने पहली फिल्म को ‘‘नफरत फैलाने वाली’’ करार देते हुए कहा कि हजारों धर्मांतरण के जो दावे किए गए थे, वे पूरी तरह निराधार थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश में कुछ संवेदनशील मामलों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रचारित करने से बचना चाहिए।
आगे का कार्यक्रम
शशि थरूर ने बताया कि उन्हें अभी तक व्यक्तिगत रूप से शिखर सम्मेलन में जाने का अवसर नहीं मिला है, लेकिन वह कल (शुक्रवार) वहां पहुंचेंगे और अपना संबोधन देंगे।
Donald Trump का ये नया आदेश पूरी दुनिया में ला सकते हैं भूचाल! जानें अब क्या करने वाले हैं अमेरिका के राष्ट्रपति
अमेरिकाके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने आव्रजन नीति में एक और कड़ा बदलाव करते हुए नया आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत देश में वैध रूप से रह रहे उन हजारों शरणार्थियों को गिरफ्तार किया जा सकता है, जिनके पास अब तक कोई स्थायी आवास (Permanent Address) नहीं है।
मिनिसोटा में बृहस्पतिवार को होने वाली संघीय अदालत की सुनवाई से पहले गृह मंत्रालय (डीएचएस) द्वारा दाखिल एक मेमो में कहा गया है कि ‘ग्रीन कार्ड’ के लिए आवेदन करने वाले शरणार्थियों को अपने आवेदनों की समीक्षा के लिए अमेरिका में प्रवेश किए जाने के एक साल बाद संघीय हिरासत में रहना होगा। बुधवार को दाखिल मेमो में कहा गया है कि डीएचएस ‘‘निरीक्षण और जांच प्रक्रिया की अवधि के लिए आव्रजकों को हिरासत में रख सकता है।’’
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मानवाधिकार कार्यकर्ता और पुनर्वास समूहों ने इस आदेश की कड़ी आलोचना की है और संभवत: इस आदेश को कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। इस आदेश से पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन के दौरान अमेरिका आए लगभग 200,000 शरणार्थियों के बीच भ्रम और भय पैदा हो सकता है। यह आदेश ट्रंप प्रशासन द्वारा आव्रजन पाबंदियों की श्रृंखला में हालिया कार्रवाई है।
पिछले साल के अंत में ‘एसोसिएटेड प्रेस’ (एपी) द्वारा प्राप्त एक मेमो में कहा गया था कि ट्रंप प्रशासन बाइडन प्रशासन के दौरान अमेरिका में प्रवेश पाने वाले सभी शरणार्थियों की समीक्षा करने की योजना बना रहा है तथा बाइडन के कार्यकाल के दौरान आए शरणार्थियों के लिए ‘ग्रीन कार्ड’ की मंजूरी तुरंत निलंबित कर दी गई थी।
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प्रशासन ने नीति में बदलाव के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक चिंताओं का हवाला दिया। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि देश में प्रवेश करने वाले शरणार्थियों की पहले से ही व्यापक जांच-पड़ताल की जाती है।
ग्रीन कार्ड आवेदकों के लिए नई शर्तें
मिनिसोटा की संघीय अदालत में बृहस्पतिवार को होने वाली सुनवाई से पहले गृह मंत्रालय (DHS) द्वारा दाखिल एक मेमो में स्पष्ट किया गया है कि:
अनिवार्य हिरासत: ‘ग्रीन कार्ड’ के लिए आवेदन करने वाले शरणार्थियों को अपने आवेदनों की समीक्षा के दौरान संघीय हिरासत में रहना पड़ सकता है।
समय सीमा: यह नियम उन शरणार्थियों पर लागू होगा जिन्हें अमेरिका में प्रवेश किए हुए एक वर्ष से अधिक समय हो गया है।
निरीक्षण प्रक्रिया: मेमो के अनुसार, डीएचएस जांच और निरीक्षण की पूरी अवधि तक आव्रजकों को हिरासत में रखने का अधिकार रखता है।
पिछली नीतियों की निरंतरता
यह आदेश ट्रंप प्रशासन द्वारा आव्रजन पाबंदियों की उस श्रृंखला का हिस्सा है जो सत्ता संभालते ही शुरू कर दी गई थी। पिछले साल के अंत में आए एक अन्य मेमो में भी यह संकेत दिया गया था कि बाइडन प्रशासन के दौरान आए सभी शरणार्थियों की फाइलों की दोबारा समीक्षा की जाएगी और उनके 'ग्रीन कार्ड' की मंजूरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था।
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